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राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ बनी सियासी बहस का केंद्र

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा निकाली जा रही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया है। यह यात्रा दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी और आसपास के इलाकों में निकाली जा रही है, जिसमें राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और राजद नेता तेजस्वी यादव भी शामिल हैं।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता को मताधिकार के महत्व के प्रति जागरूक करना और कथित मतदाता सूची से नाम काटने की साजिशों के खिलाफ आवाज़ उठाना बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग (EC) पर सीधा हमला करते हुए कहा:

“गुजरात मॉडल अब वोट चोरी मॉडल बन गया है। PM मोदी और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। हमारे पास सबूत हैं, जिन्हें जल्द देश के सामने रखा जाएगा।”

इस बयान के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा ने राहुल के आरोपों को “झूठ और भ्रम फैलाने की कोशिश” बताया और पलटवार करते हुए उन्हें तथा तेजस्वी यादव को “बरसाती मेंढक” कह डाला — यानी चुनाव आते ही राजनीति में कूद पड़ने वाले मौसमी नेता।

एक और विवाद उस वक्त खड़ा हो गया जब यात्रा के दौरान एक व्यक्ति द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर गिरा दी गई। इस पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को दलित समाज और संविधान निर्माता के प्रति कोई सम्मान नहीं है।

इसके जवाब में कांग्रेस ने सफाई दी कि यह एक दुर्घटनावश घटना थी और भाजपा इसे जानबूझकर सांप्रदायिक और जातिगत रंग देने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा ना सिर्फ मतदाता जागरूकता का प्रयास है, बल्कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन की तरफ से बिहार में राजनीतिक वापसी की बड़ी रणनीति भी हो सकती है।

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