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हर अच्छी चीज़ का अंत होता है – चेतेश्वर पुजारा ने सभी प्रारूपों से संन्यास लिया

On: August 24, 2025 1:34 PM
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Cheteshwar Pujara Retirement
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103 टेस्ट में 7195 रन बनाने वाले भरोसेमंद बल्लेबाज़ ने भारतीय क्रिकेट को कहा अलविदा

नई दिल्ली।
भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। 37 वर्षीय पुजारा ने आख़िरी बार जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में भारत के लिए खेला था।


पुजारा का भावुक संदेश

सोशल मीडिया पर संन्यास की घोषणा करते हुए पुजारा ने लिखा—
“भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर उतरकर पूरी कोशिश करना – इसे शब्दों में बयान करना असंभव है। लेकिन जैसा कहा जाता है, हर अच्छी चीज़ का अंत होता है, और अत्यधिक आभार के साथ मैंने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का निर्णय लिया है। धन्यवाद, आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए।”


शानदार करियर

पुजारा ने अक्टूबर 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था।

  • उन्होंने 103 टेस्ट और 5 वनडे खेले।
  • टेस्ट में उन्होंने 7195 रन बनाए, औसत 43.60, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं।
  • अफगानिस्तान को छोड़कर हर टेस्ट खेलने वाले देश के खिलाफ शतक जड़ा।
  • ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ 5-5 शतक और श्रीलंका के खिलाफ 4 शतक लगाए।
  • 2018-19 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में 521 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज़ बने, जिसने भारत को ऑस्ट्रेलियाई सरज़मीं पर पहली टेस्ट सीरीज़ जीत दिलाई।

IPL और सीमित ओवरों में सफर

पुजारा का सीमित ओवरों में करियर उतना सफल नहीं रहा।

  • उन्होंने 2013-14 में सिर्फ 5 वनडे खेले और 51 रन बनाए।
  • IPL में तीन टीमों का हिस्सा रहे—कोलकाता नाइट राइडर्स (2010), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (2011-13), किंग्स इलेवन पंजाब (2014)
  • 2021 में चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़े लेकिन कोई मैच नहीं खेल पाए।

घरेलू और काउंटी क्रिकेट

पुजारा ने 2005 में सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की थी और 2024-25 रणजी ट्रॉफी में भी खेले। उन्होंने इंग्लैंड काउंटी क्रिकेट में ससेक्स की ओर से भी प्रदर्शन किया।


भारतीय क्रिकेट को मिला ‘नया द्रविड़’

अपने ठोस और धैर्यपूर्ण बल्लेबाज़ी अंदाज़ के लिए पुजारा को “नया राहुल द्रविड़” कहा जाता था। कठिन परिस्थितियों में क्रीज़ पर डटे रहना उनकी सबसे बड़ी ताक़त रही।

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